Adi Kailash Yatra 2022 : आदि कैलास यात्रा के लिए तेजी से हो रही बुकिंग, जानिए किराया और अन्य जरूरी अपडेट्स

Adi Kailash Yatra 2022 : आदि कैलास यात्रा के लिए तेजी से हो रही बुकिंग, जानिए किराया और अन्य जरूरी अपडेट्स





Adi Kailash Yatra 2022 आदि कैलास यात्रा 2022 के लि‍ए बुक‍िंंग शुरू हो चुकी है। दो जून से शुरू हो रही यात्रा के लिए दो जून के साथ ही चार जून व छह जून के ग्रुप में बुकिंग फुल हो चुकी है।

नैनीताल, जागरण संवाददाता : कोरोना महामारी की वजह से दो साल से ठप आदि कैलास यात्रा 2022 (Adi Kailash Yatra 2022) को लेकर इस बार श्रद्धालुओं में अच्छा खासा उत्साह दिख रहा है। कुमाऊं मंडल विकास निगम संचालित आदि कैलास यात्रा को लेकर इस बार आलम यह है कि दो जून से शुरू हो रही यात्रा के लिए दो जून के साथ ही चार जून व छह जून के ग्रुप में बुकिंग फुल हो चुकी है। हर जत्थे में 50 से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं।

कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इस बार यात्रा के लिए परिवहन व प्रचार प्रसार समेत पंजीकरण के लिए प्रसिद्ध ट्रेवल्स कंपनी ट्रिप टू टेम्पल्स के साथ करार किया है। यह संस्था नेपाल के रास्ते कैलास मानसरोवर यात्रा का आयोजन करती है। जो इस बार पहली जुलाई से प्रस्तावित है। सड़क मार्ग से प्रति श्रद्धालु डेढ़ लाख जबकि हवाई मार्ग से एक लाख 90 हजार है। इस बार करीब चार हजार श्रद्धालु कैलास मानसरोवर जाएंगे।

दो जून को काठगोदाम से रवाना होगा पहला दल

कंपनी के डायरेक्टर विकास मिश्रा ने बताया कि लिपुलेख के रास्ते आदि कैलास यात्रा के लिए अब तक दो सौ श्रद्धालु पंजीकरण करवा चुके हैं। दो जून को पहला दल काठगोदाम से पिथौरागढ़ के लिए रवाना होगा। मिश्रा के अनुसार दो, चार व छह जून के लिए बुकिंग फुल हो चुकी है जबकि आठ जून, 10 जून व 12 जून को रवाना होने वाले दल के लिए 60 प्रतिशत पंजीकरण हो चुके हैं। जुलाई के बाद वाले दलों के लिए बुकिंग शुरू नहीं की गई है। जिन श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है, उसमें दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली समेत उत्तर भारत के राज्य शामिल हैं।

3945 श्रद्धालु कर चुके हैं अब तक आदि कैलास

कुमाऊं मंडल विकास निगम के जीएम एपी बाजपेयी के अनुसार निगम 1994 से इस यात्रा का संचालन कर रहा है, अब तक 180 दलों में 3945 श्रद्धालु आदि कैलास यात्रा कर चुके हैं। यात्रा अवधि सात रात, आठ दिन हैं। इस बार पिथौरागढ़ जिले में उच्च हिमालयी इलाकों में सड़क मार्ग की सुविधा होने की वजह से श्रद्धालुओं को करीब सवा सौ किमी (आना जाना) पैदल नहीं चलना पड़ेगा।

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